कैप्टन भगत राम गर्ग – भारत देश के रक्षक & लेखक

Posted By @Panwer Dishu

यह कविता केैप्टन भगत राम जी द्वारा लिखी गयी है जो उनकी जिंदगी की व्याख्या करती है , कैप्टन भगत राम जी ने जब से भारतीय सेना जॉइन की तब से लेकर अब तक की कहानी को उन्होंने इन चंद अल्फाज़ों में पिरोया है आशा करते हैं कि आपको यह पसंद आये , कहानी से पहले उनका परिचय पढ़ लिजिये।

एक परिचय 
कैप्टन भगत सिंह हिमाचल के मांगल गांव के रहने वाले है उनकी जीवन संघर्षों से बिता, कुछ ही दिन पहले मांगल , शालुघाट में अामरण अनशन हुआ था और अनशन में कैप्टन भगत राम भी शामिल थे और ग्रांम वासियों की खातिर आठ दिन तक भुखे प्यासे रहे थे। तो आईये अब पढ़ते है उनकी कहानी जो उन्होनें खुद लिख कर हमें भेजी है।

कैप्टन भगत राम गर्ग – 
जय भारत जय हिंद(-: प्रिय देश व प्रदेश वासियों आपको अपने जीवन की जंग वह भी सच्ची घटना सही बात बयान कर रहा हूं जी। मैं कैप्टन भगत राम गर्ग गांव सहनाली मागल।। सही मायने में एक बात के दस दस मतलब निकालने होगे। तभी आप इस दर्द भरी दास्तां को समझेंगे। क्योंकि साथ छोडने वालों को बहाना चाहिए वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाजे तक साथ नहीं छोडते परन्तु वह फौज थी शायद यह फर्क हो सकता है। तो सुनो ध्यान लगाकर जी।                              कारगिल युद्ध था घर में बाप बुद्ध था। छोटे छोटे बच्चे थे। जो मन बडे सच्चे थे। आगे सफर था। पिछे हम सफर था। रूकते तो सफर छुट जाता। और चलते तो हमसफर छुट जाता। मंजिल दुश्मन से लडने की हसरत भी थी। घर बैठे हम सफर से मोहब्बत भी थी। ये दिल तू ही बता उस बक्त मैं कहां जाता। देश के सम्मान का एक सफर भी था। और बरसों का मेरा हम सफर भी था। रुकता देश पिछड जाता। और चलता तो जीवन साथी विखर जाता। यु समझ लो। कि प्यास लगी थी गजब की। मगर पानी में जहर था। पीते तो मर जाते। और न पीते तो भी मर जाते। बस यही दो मस्ले सेना में जिन्दगी भर हल नहीं हुऐ। न नीद पुरी हुई। और न ख्वाब मुकम्मल हुऐ। वक्त ने कहा काश थोड़ा सब्र होता। और सब्र ने कहा काश थोड़ा और बक्त होता। सुबह उठना पड़ता था। नाम व देश की नाक रखने के लिए। और सोता नहीं था। जीवन की जंग व सासों की सलामती के लिए। दोस्तों देवी देवताओं की कुप्या ने एक तमाशा दिखाया। मैंने दुश्मन के ऊपर जीत का तिरंगा फहराया। होसलो के तरकश में शिकायत किससे करता। क्या जो खो चुके थे सुहाग उन पर मातम करता। आजीव सौदागर है ये वक्त भी। जवानी का लालच देकर बचपन ले गया। अब अमीरी का लालच देकर जवानी ले जाएगा। अब लोट आता हूँ। वापस घर की तरफ थका हारा। आज तक समझ में नहीं आया। कि जीने के लिए काम करता हूँ। या काम के लिए जीता हूं। बचपन में सबसे ज्यादा वार पुछा गया मुझसे यह सवाल। कि बडा होकर क्या बनना चाहते हैं। अब उत्तर मिला। कि फिर से बच्चा बनना चाहता हूं। क्योंकि थक गया हूं। तेरी भक्ति से ये भगत राम गर्ग ऐ जिन्दगी मुनासिब हो तो कुछ तो हिसाब कर दे। भरी जेब ने दुनिया की पहचान करवाई। और खाली जेब ने आपनो की। कोई पूछे कि कैसे हो। न इच्छा से भी हसकर कहना पड़ता है। मजे में हूं। कैसी विडंबना है कि माचिस की जरूरत नहीं पड़ती यहां। आदमी आदमी से जलता है। दुनिया के सबसे बड़े सांईटिस्ट यह ढुढ रहे हैं कि मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं। परन्तु हमारे मॉगल निवासी यह नहीं सोच रहे हैं कि मांगल में कब मंगल होगा। निखर कर या विखर कर। दोस्तों यह भगत राम गर्ग का बिस्वास है कि भगवान् टूटने वाले को किसी के सहारे नहीं छोडता। स्वयं सहारा बनता है। और तोडने वाले को छोडता ही नहीं। चाहे सारे संसार के सहारे लगाते रहे। बिस्वास में वह शक्ति है जिससे उजडी हुई दुनिया में प्रकाश लाया जा सकता है। बिस्वास पत्थर को भगवान् बना सकता है। और अविश्वास इन्सान से पत्थर बना देता है। मत मन को छोटा करो हर डर के आगे जीत है। सही लोगों के सम्पर्क में रहो सही ही होगा कारगिल युद्ध जीता है। इन परिस्थितियों को भी जीतेगे। बस कुछ दुर है मंजिल आप आपनी पराकाष्ठा पर खरे उतरते हुए सत्य मेव विजयाते। का नारा बुलंद करो। गिरते हैं वे शहशहजादे जो घोडो पर सवार होते हैं बूझदिल क्या गिरेगा। जो लेटकर सवाल करता है। तो दोस्तो आप आभिमान करो नहीं स्वाभिमान छोडो नहीं।  सदैव आपके पास पास व साथ-साथ आपका हितैषी कैप्टन भगत राम गर्ग गांव सहनाली मांगल। धन्यवाद जी 💘✊💘✊💘✊✌✌✌✌ ✌ जय हिंद जय भारत माता की


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