भक्ति की महिमा – Lord Shiva | Shivaratari Spacial

जय भोलेनाथ जय महादेव. आज 13 फरवरी 2018, शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर आप सभी भाइयो बहनों को Shivaratri की ढेर सारी शुभकामनाएं. आज भोलेनाथ का दिन है तो आज हम किसी दुसरे टॉपिक पर पोस्ट नहीं लिखेंगे आज का दिन शिवजी के लिए समर्पित है. बहुत सारे शिवभक्त हमारी इस पोस्ट को पढ़ रहे होंगे, आज भक्ति और श्रधा से जुडी कुछ पोस्टें हम प्रकाशित कर रहे है इस पोस्ट में आपके लिए भक्ति से जुडी एक कविता है आशा करता हूँ की आप को अच्छी लगे, अगर आपको कविता अच्छी लगे तो शेयर करें कमेंट करें थैंक यू.  

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यह कविता संत कबीर दास जी द्वारा रची गयी है जो सीधे सीधे भक्ति करने और भक्ति के सही मतलब को दर्शाती है संत कबीर दास जी को कौन नहीं जनता वो ऐसे कवि थे कि आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है.
भक्ति की महिमा / कबीर
भक्ति बीज पलटै नहीं, जो जुग जाय अनन्त |
ऊँच नीच घर अवतरै, होय सन्त का सन्त ||


की हुई भक्ति के बीज निष्फल नहीं होते चाहे अनंतो युग बीत जाये | भक्तिमान जीव सन्त का सन्त ही रहता है चाहे वह ऊँच – नीच माने गये किसी भी वर्ण – जाती में जन्म ले |


भक्ति पदारथ तब मिलै, तब गुरु होय सहाय |
प्रेम प्रीति की भक्ति जो, पूरण भाग मिलाय ||


भक्तिरूपी अमोलक वस्तु तब मिलती है जब यथार्थ सतगुरु मिलें और उनका उपदेश प्राप्त हो | जो प्रेम – प्रीति से पूर्ण भक्ति है, वह पुरुषार्थरुपी पूर्ण भाग्योदय से मिलती है |


भक्ति जो सीढ़ी मुक्ति की, चढ़ै भक्त हरषाय |
और न कोई चढ़ि सकै, निज मन समझो आय ||

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भक्ति मुक्ति की सीडी है, इसलिए भक्तजन खुशी – खुशी उसपर चदते हैं | आकर अपने मन में समझो, दूसरा कोई इस भक्ति सीडी पर नहीं चढ़ सकता | (सत्य की खोज ही भक्ति है)


भक्ति बिन नहिं निस्तरे, लाख करे जो कोय |
शब्द सनेही होय रहे, घर को पहुँचे सोय ||


कोई भक्ति को बिना मुक्ति नहीं पा सकता चाहे लाखो लाखो यत्न कर ले | जो गुरु के निर्णय वचनों का प्रेमी होता है, वही सत्संग द्वरा अपनी स्थिति को प्राप्त करता है |


भक्ति गेंद चौगान की, भावै कोइ लै लाय |
कहैं कबीर कुछ भेद नहिं, कहाँ रंक कहँ राय ||


भक्ति तो मैदान में गेंद के समान सार्वजनिक है, जिसे अच्छी लगे, ले जाये | गुरु कबीर जी कहते हैं कि, इसमें धनी – गरीब, ऊँच – नीच का भेदभाव नहीं है |


कबीर गुरु की भक्ति बिन, अधिक जीवन संसार |
धुँवा का सा धौरहरा, बिनसत लगै न बार ||


कबीर जी कहते हैं कि बिना गुरु भक्ति संसार में जीना धिक्कार है | यह माया तो धुएं के महल के समान है, इसके खतम होने में समय नहीं लगता |


जब लग नाता जाति का, तब लग भक्ति न होय |
नाता तोड़े गुरु बजै, भक्त कहावै सोय ||


जब तक जाति – भांति का अभिमान है तब तक कोई भक्ति नहीं कर सकता | सब अहंकार को त्याग कर गुरु की सेवा करने से गुरु – भक्त कहला सकता है |


भाव बिना नहिं भक्ति जग, भक्ति बिना नहीं भाव |
भक्ति भाव एक रूप हैं, दोऊ एक सुभाव ||


भाव (प्रेम) बिना भक्ति नहीं होती, भक्ति बिना भाव (प्रेम) नहीं होते | भाव और भक्ति एक ही रूप के दो नाम हैं, क्योंकि दोनों का स्वभाव एक ही है |


जाति बरन कुल खोय के, भक्ति करै चितलाय |
कहैं कबीर सतगुरु मिलै, आवागमन नशाय ||


जाति, कुल और वर्ण का अभिमान मिटाकर एवं मन लगाकर भक्ति करे | यथार्थ सतगुरु के मिलने पर आवागमन का दुःख अवश्य मिटेगा |


कामी क्रोधी लालची, इतने भक्ति न होय |
भक्ति करे कोई सुरमा, जाति बरन कुल खोय ||


कामी, क्रोधी और लालची लोगो से भक्ति नहीं हो सकती | जाति, वर्ण और कुल का मद मिटाकर, भक्ति तो कोई शूरवीर करता है |
कविता क्रेडिट – कविताकोश
तो ये थी कविता दोस्तों आपको इस कविता से काफी कुछ सिखने को भी मिला होगा और काफी कुछ आप समझे भी होंगे की आखिर भक्ति है क्या चीज़ और भगवान् क्या है ? अगर आपको यह पोस्ट अच्छी और प्रेरणादायक लगी हो तो अपने मित्रो से इस पोस्ट की लिंक जरुर शेयर करें धन्यवाद
एक बार फिर से आप सभी को शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें. आपका दिन मंगलमय हो. जय भोलेनाथ

Team : www.imdishu.com

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