चाणक्य निति | हिन्दी में जरुर पढे सफलता के लिये

नमस्कार मित्रों आज आपके लिये महान चाणक्य के कुछ अनमोल विचार लेकर आया हुं आशा करता हुं आपको जरुर पसंद आए , और इससे आपको सीखने को मिलेगा. क्योंकि यह चाणक्य के कुछ अनमोल नितियां है जो आपको जीने की एक नयी राह देगी और कभी धोखा नहीं खाने देगी.

Chankya ke anmol vichar in hindi

चाणक्य निति –
1) एैसी जगह बिल्कुल भी निवास न करें जहां यह पांच चिज़ें न हो :
1.एक अच्छा राजा.
2.एक नदी.
3.एक पंडित (जो वेदों और शास्त्रों को जानता हो).
4.एक चिकित्सक (Doctor).
5.एक धनवान आदमी.

2) भविष्य में आने वाली मुसिबतों (आपदाओं) के लिये पहले से ही धन एकत्रित करके रखे, एैसा न सोचें कि एक धनवाल के लिये मुसिबत कहां से आयेगी , क्योंकि जब धन खत्म होने लगता है तो वह तेजी से खत्म होने लगता है.

3) दुष्ट पत्नी , मुर्ख नौकर , झुठे मित्र के साथ निवास करना साक्षात मृत्यु के साथ निवास करने समान होता है.

4) एक पंडित भी मुसिबत में आ सकता है यदि वह किसी मुर्ख आदमी को उपदेश दे.

5) इन चारों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए :
1.राज घराने के लोगो पर.
2.किसी भोली दिखने वाली औरत पर.
3.लम्बे नाखुन या सींग वाले पशुओं पर.
4.गहरी नदी पर.

6) असत्य कहना , मुर्खता करना , लालच करना , छल करना , अपवित्रता , और निर्दयता करना यह सभी निर्गुण औरतों में अवश्य होते है.

7) एैसे लोगों से उचित दुरी बनाये रखें जो आपके सामने मिठी बातें करते है पंरतु आपकी पीठ पिछे आपके खिलाफ बोलते है क्योंकि एैसे लोग उस विष के घड़े के समान होते है जिस की उपरी सतह दुध से भरी होती है.

8) मन में सोचे हुए कार्य की योजना को किसी के सामने न कहें बल्कि उसे मनन करके सफल बनाये.

9) मुर्खता दुखः देती है , जवानी भी दुखः देती है लेकिन इससे ज्यादा दुखः किसी के घर जाकर उसका एहसान लेना देती हैं.

10) हर पर्वत पर माणिक्य नहीं पाये जाते , न ही हर हाथी के सिर पर मणी होते है , इसी प्रकार सज्जन पुरुष भी सभी जगहों पर नहीं पाये जाते और न चंदन के वृक्ष हर वन में मिल सकते है.

11) नदी किनारे वाले वृक्ष , दुसरे के घर में निवास करने वाला स्त्री , एंव मुर्ख मंत्रीयो वाला राजा , यह सभी निश्चय ही खत्म हो जाते है.

12) एक सांप और दुर्जन व्यक्ति में अंतर होता है कि सांप खुद पर आपत्ति आने पर ही आपको डंक मारेगा , लेकिन दुर्जन मनुष्य आपको कदम कदम पर डसेगा.

13) अपने साथ हमेशा अच्छे कुल के लोग रखने चाहिए क्योंकि यह न आंरम्भ में न बीच में न अंत में आप का साथ छोड़ते है.

14) जब प्रलय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्यादा लांघ कर तबाही मचाता है लेकिन सज्जन पुरुष किसी भी आपत्ति में अपनी मर्यादा नहीं भुलते.

15) आलसी मनुष्य का न वर्तमान होता है न ही भविष्य.

16) दसरों द्वारा की गयी गलतियों से सीखो , खुद के अनुभव से सीखने लगेंगे तो उम्र कम पड़ जायेगी.

17) इन्सान अपने गुण और व्यक्तित्व से ऊपर उठता है , उंची गद्दी पर बैठने से नहीं.

18) शेरों से सीखो हमेशा , हर कार्य को जोरदार और मेहनत से करना.

19) बुद्धिमान व्यक्ति का कोई शत्रु नहीं हो सकता क्योंकि वह अपनी बुद्धि के ज़ोर पर सभी को अपना मित्र बना सकता है.

20) जब भय आपकी तरफ आने की कोशिश करे तो उस पर आक्रमण करके उसे नष्ट कर दो.

21) व्यक्ति अपने कर्मों से महान् बनता है , जाति और जन्म से नहीं.

22) शिक्षा इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती है क्योंकि जिस इंसान में शिक्षा होती है वह हर जगह सम्मान पाता है और शिक्षा सुंदरता को भा पराजित कर देती है.

23) हर एक की मित्रता के पिछे कोई न कोई स्वार्थ छुपा होता है कोई बिना स्वार्थ के मित्रता नहीं करता यह एक कटू सत्य है.

24) इंसान का अति इमानदार होना असंभव है क्योंकि जो पेड़ अधिक सीधा होता है लक्कडहारा उसी पेड़ को पहले काटता है एंव हमें आवश्यक्ता से अधिक इमानदार नहीं बनना चाहिए.

25) उन लोगो से कभी मित्रता नहीं करनी चाहिए जो कुल के अधिक धनवान अथवा निर्धन हो क्योंकि एैसी मित्रता हमेशा ही दुखदायी होती है.

26) यदि आप कोई कार्य शुरु कर रहे है तो असफलता से डरकर रुकिये मत क्योंकि जो लोग असफलता से बिना ड़रे कार्य करते है भविष्य में वही लोग सफल होकर इतिहास रचते हैं.

27) सर्प ज़हरीला न होने पर भी उसे ज़हरीला दिखना चाहिए तभी लोग उससे डरकर उचित दुरी बनाये रखेंगे अन्यथा उसे मरियल सा समझ कर पैरों तले कुचल देंगे , ठीक इसी प्रकार मनुष्य को भी आवश्यकता से अधिक सीधा नहीं दिखना चाहिए.

28) इस धरती पर तीन रत्न है :
1.अनाज.
2. जल
3. मधुर वचन.
मुर्ख लोग इन तीन रत्नों को पत्थर समझ कर ठोकर मारते है और अपने लिये नर्क का प्रबंध करते है.

29) इश्वर किसी पत्थर की मुर्ति में नहीं हो सकते , इश्वर तो आपके मन में है और उनका मंदिर आपकी आत्मा , इसिलिये अपनी आत्मा को शुद्ध रखो.

30) जिस प्रकार गाय का बछडा हज़ारों गायो के बीच में अपनी माता को पहचानकर उसके पिछे जाता हे उसी प्रकार आपके कर्म आपको पहचाकर आपके पिछे चले आते है और आपको उन कर्मो के आधार पर उनका फल दिया जाता है.

क्या इस लेख से आपको कुछ सीखने को मिला ? यदि हां तो हमें कॉमेंट द्वारा जरुर बताएं और जल्द ही हम आपके लिये नया लेख लायेंगे जो आप को सफलता तक पहुंचायेगा.
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